गला बैठने पर ठण्ड के मौसम में इन टिप्स से उठायें सूपर फायदा

गला बैठने पर ठण्ड के मौसम में इन टिप्स से उठायें सूपर फायदा

गला बैठने पर

जैसे जैसे मौसम में सर्दी का प्रकोप बढ़ता जाता है बहुत से लोगों को गला बैठने पर और खराश की समस्या बार बार बनने लगती है । बहुत लोगों को आदत होती है कि वो बहुत ज्यादा ठण्डा खाते हैं और इस मौसम में भी आइसक्रीम और कोल्डड्रिंक का सेवन गर्मी की तरह ही करते हैं । ऐसे लोगों के शरीर में कफ का प्रकोप बढ़ जाता है और उनको गले में भारीपन की समस्या होकर आवाज अवरुद्ध होने लगती है । इसके अलावा टॉन्सिल का होना और कुछ भी गटकने में दिक्कत पैदा होने लगती है । तो आज हम जानकारी देते हैं कुछ ऐसे उपायों के बारे में जिनको अपनाकर आप गला बैठने पर समस्या से छुटकारा पा सकते हैं और दर्द एवं सूजन से भी राहत पा सकते हैं ।

गला बैठने पर अदरक का प्रयोग :-

अदरक का प्रयोग गला बैठने और दर्द को दूर करने के लिए बहुत ही गुणकारी रहता है । अदरक के अंदर एंटीइंफ्लामेंट्री और एनल्जेसिक गुण पाये जाते हैं । दर्द और सूजन की समस्या को दूर करने के लिए और स्रोतों में कफ प्रकोप से पैदा हुए अवरोध को दूर करने के लिए अदरक का प्रयोग बहुत गुणकारी रहता है । गला बैठ जाने की समस्या हो जाने पर आप अदरक का काढ़ा बनाकर दिन भर में दो बार सेवन कर सकते हैं । इसके अतिरिक्त अदरक के छोटे छोटे टुकड़े काटकर उन पर काला नमक छिड़क कर इनको चूस चूस कर खा सकते हैं । ऐसा करने से गला भी खुल जाता है और जमा बलगम भी निकल जाता है ।


गला बैठने पर सेंधा नमक :-

गला बैठने पर गरारे करना कितना ज्यादा लाभकारी रहता है यह किसी से छिपा हुआ नही है । आमतौर पर गले में खराश होने पर, गला बैठने पर हम सब गरारे करते ही हैं लेकिन 95% लोग गरारे करने के लिए साधारण समुन्द्री नमक का प्रयोग करते हैं । लेकिन क्या आप जानते हैं कि यदि हम गला बैठने पर गरारे करने के लिए साधारण की जगह सेंधा नमक का प्रयोग करें तो यह बहुत ही ज्यादा और बेहतर विकल्प होता है । यदि बार बार गले को खिच खिच करने से गले के अन्दर चुभन पैदा हो गयी है और दर्द ज्यादा होने लगा है तो ऐसी दशा में गुनगुने गर्म पानी में चौथाई चम्मच सेंधा नमक मिलाकर दिन भर में 2-3 बार गरारे करने से आराम मिलने लगता है ।


गला बैठने पर काली मिर्च :-

काली मिर्च को सबसे अच्छा एंटी एलर्जिक माना जाता है । काली मिर्च के अंदर सूजन और संक्रमण को दूर करने की शक्ति पायी जाती है इसके अलावा कफ को पिघला कर निकालने में भी काली मिर्च बहुत ही अच्छी आयुर्वेदिक औषध के तौर पर जानी जाती है । गला बैठने पर रोगी जितना परेशान आवाज ना निकल पाने से होता है उससे ज्यादा परेशानी जोर से बोलने का प्रयास करने के कारण माँसपेशियों में सूजन आने से होती है । रही सही कसर पूरी हो जाती है कफ के बढ़ जाने से । तो इन सब दशाओं में गला बैठने पर काली मिर्च के दो दाने फोड़कर उनका चूरा बना लें और आधा अथवा एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर चाट कर खाने से आराम मिलता है । यह प्रयोग दिन में दो बार करना चाहिए ।


गला बैठने पर सावधानी :-

गला बैठने पर जितना फायदा इलाज से होता है उससे कही ज्यादा लाभ सही परहेज और सावधानी से होता है । गला बैठने पर रोगियों को ठण्डी चीजों का पूरी तरह परहेज करना चाहिये और कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम, दही, खटाई, मिर्च मसाले दार, जंक फूड, इमली, चटनी आदि जैसी चीजों का पूरी तरह परहेज करना चाहिये । खाना ताजा बना और सात्विक प्रकार का होना चाहिये । पानी भी पकाकर पीना चाहिये ।



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