जूस जरूर पीजिये किंतु, रखें इन बातों का ख्याल…..

juice ka dhyaan

जूस जरूर पीजिये किंतु, रखें इन बातों का ख्याल…..
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फल-सब्जियों के रसों का सेवन करते समय अधिकांश स्त्री-पुरुषों के सामने अनेक सवाल उभरते हैं कि फल-सब्जियों के रसों का सेवन कब और कितनी मात्रा में किया जाये? कुछ स्त्री-पुरुष घर में फल-सब्जियों का रस सेवन करना पसंद करते हैं, लेकिन कुछ स्त्री-पुरुष फल सब्जियों को छीलकर, उन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर, मिक्सी या जूसर में डालकर रस निकालने की परेशानी से बचने के लिये बाजार में रस पीना अधिक पसंद करते हैं । बाजार में रस पीने वाले स्त्री-पुरुष थोड़ी सी परेशानी से बचने के लिये अक्सर भारी मुसीबत मोल लेलेते हैं ।
चिकित्सा जानकारों के अनुसार बाजार में फलों का रस बेचने वाले स्वच्छता का पूरा ध्यान नही रख पाते । घरों में फल-सब्जियों को अच्छी तरह देखकर सेवन किया जाता है, लेकिन बाजार में कुछ जूस विक्रेता अधिक धन कमाने के लालच में पुराने, बासी और कीड़े लगे, सड़े हुये फलों का रस निकाल देते हैं । कुछ जूस विक्रेता फलों का अधिक मात्रा में रस निकाल देते हैं, जो उनके पात्रों में बच जाता है । ऐसी स्थिती में जब कोई दूसरा ग्राहक आता है तो पहले बचे हुये रस में नया रस मिलाकर दे देते हैं ।
फलों और सब्जियों को काटकर अथवा उनका रस निकाल कर कुछ देर के लिये रख दिया जाये तो उनके पौष्टिक तत्व नष्ट होने लगते हैं । फलों के रासायनिक तत्व स्टील के बर्तन के साथ रासायनिक क्रिया करके हानिकारक तत्वों की उत्पत्ति करके रसों को विषैला बना देते हैं ।
किसी स्टील के पात्र में नीम्बू का रस डालकर रखे गये प्याज, मूली, गाजर, खीरे के सलाद को तीस-चालीस मिनट के बाद खाया जाये तो कुछ कषैलापन अनुभव होता है । यह कषैलापन नीम्बू और सब्जियों के रस और स्टील के पात्र की राआयनिक क्रियाओं के कारण उत्पन्न होता है । फल-सब्जियों के रसों को निकालकर फ्रिज में रख दिया जाये तो भी कुछ समय के बाद रस अपनी गुणवत्ता खो देते हैं और फिर शरीर को लाभ देने के बजाय हाँइ पहुँचाने लगते हैं ।
ग्रीष्म ऋतु में बाजारों में जगह-जगह गन्ने के रस की दुकाने दिखायी देने लगती हैं । इन दुकानों पर मक्खियों को भी बहुतायत से देखा जा सकता है । कई बार तो इन मक्खियों के कारण वहाँ खड़े होकर जूस पी पाना भी मुश्किल हो जाता है । ऐसी स्थिती में गन्ने के साथ मख्खियों का भी जूस अक्सर निकल ही जाता होगा । कुछ रस विक्रेता गन्नों को जल से अच्छी तरह साफ किये बिना ही रस निकाल देते हैं । धूल-मिट्टी के कारण इस रस से हानि हो सकती है ।
गन्ने का रस मशीन से निकालने के साथ ही सेवन करना चाहिये क्योकि कुछ देर बाद उसके पौष्टिक तत्व नष्ट होने लगते हैं और उसका स्वाद परिवर्तित होने लगता है । कुछ गन्नों में लाल रंग के कीड़े लगे होते हैं, अक्सर ऐसे गंदे गन्नों का भी रस निकाल कर पिला दिया जाता है ।
जब भी फलों का रस निकालें, मिक्सी-जूसर को पहले अच्छी तरह स्वच्छ जल से साफ कर लें । जूस निकालने के बाद भी जूसर को पुनः साफ करके ही रखें क्योकि ऐसे ही छोड़ देने से जूसर में लगी जूस की बूँदे अथवा फल-सब्जियों के टुकड़ों में होने वाले रासायनिक परिवर्तन जूसर को बहुत संक्रमित कर सकते हैं । बाद में जब दोबारा जूस बनाने के लिये इस जूसर को प्रयोग में लाया जाता है तो प्रायः पानी से यह संक्रमण साफ नही हो पाता है ।
आधुनिक परिवेश में डिब्बाबंद रसों का प्रचलन तेजी से विकसित हो रहा है । रसों को डिब्बों में बंद करते समय, उन्हे अधिक समय तह सुरक्षित रखने के लिये अनेक रसायन मिलाये जाते हैं । रसों को अधिक तापमान पर पैक किया जाता है । अधिक तापमान के कारण रसों के पौष्टिक तत्व नष्ट हो जाते हैं । डिब्बाबंद रस स्वादिष्ट बनाये जाते हैं । इसके लिये उनमें रासायनिक फ्लेवर मिलाये जाते हैं । इस प्रकार ये स्वाद तो लगते हैं किंतु अंततः ये शरीर के लिये हानिकारक ही सिद्ध होते हैं ।
फलों-सब्जियों के साथ अक्सर खेतों और पेड़ों की धूल-मिट्टी लगी होती है । उन्हें कीटों से सुरक्षित रखने के लिये उन पर कीटनाशक औषधियों का छिड़काव किया जाता है । अधिक पैदावार के लिये कई तरह के फर्टिलाईजर भी इस्तेमाल किये जाते हैं । जब बाजार से लाई गये सब्जी-फल पानी से साफ किये बिना काटकर सेवन किया जाता है तो इन विभिन्न कैमिकलों का भी सेवन हम अन्जाने में ही कर लेते हैं ।
सामन्यतः फल व सब्जियों के रस का सेवन दोपहर के भोजन के तीस मिनट बाद करना चाहिये और रस बहुत धीरे धीरे पीना चाहिये, ऐसा करने से लार ग्रंथियाँ अधिक सक्रिय होकर अधिक लार की उत्पत्ति करती हैं । रस के साथ अधिक लार शरीर में पहुँचकर शर्करा (शुगर) को पचाने में बहुत सहायता करती है ।
किसी रोग विकार से पीड़ित होने पर फल-सब्जी के जूस का सेवन करने से पहले चिकित्सक से परामर्श करना बहुत आवश्यक होता है ।
कुछ स्त्री-पुरुष फल-सब्जियों के रस की मात्रा निर्धारित नही कर पाते हैं । फलों के रस अधिक स्वादिष्ट होते हैं, फिर सेंधा नमक, काली मिर्च का चूर्ण और नीम्बु का रस मिलाकर सेवन करने से रस अधिक स्वादिष्ट लगते हैं । अधिक मात्रा में फल-सब्जियों के रस का सेवन करने से हानि की सम्भावना बढ़ जाती है क्योकि हमारी पाचन शक्ति अधिक पौष्टिक एवं शक्तिवर्धक रसों को एक निश्चित मात्रा तक ही पचा पाती है ।
रसों के सेवन से शारीरिक शक्ति के साथ साथ पाचन शक्ति भी विकसित होती है । ऐसी स्थिती में धीरे-धीरे फल-सब्जियों के रसों की मात्रा बढ़ा सकते हैं ।
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