अदरक से मिलने वाले स्वास्थय लाभ…..

adrak ke laabh

अदरक का प्रयोग सम्पूर्ण विश्व में किया जाता है क्योकि इसका स्वाद बहुत हटकर होता है और जिस चीज में भी इसको मिला दिया जाता है ये उसका स्वाद भी बढ़ा देता है । स्वास्थय के दृष्टिकोण से भी देखा जाये तो अदरक के गुण कही पर भी कम नजर नही आते । अगर ईमानदारी से अदरक के सभी गुणों को लिखा जाये तो शायद पूरा ग्रंथ तैयार हो जायेगा । आयुर्वेदिक संहिताओं में अदरक को “शुण्ठी” के नाम से वर्णित किया गया है । अदरक में पेट का दर्द खत्म करने और उल्टी को रोकने की प्रकृति होती है, इसके अतिरिक्त अदरक दादनाशक, सूजन नाशक, एण्टी-सेप्टिक, जीवाणुरोधी, विषाणुनाशक और कास-खाँसी नाशक होता है । अदरक में विटामिन ए, सी, ई और बीकॉम्प्लेक्स, मैग्निशियम, फॉस्फोरस, पोटशियम, सिलिकॉन, ऑयरन, जस्ता और कैल्शियम आदि तत्व पाये जाते हैं । अदरक से हमें क्या क्या स्वास्थय लाभ मिलते हैं पाइये जानकारी प्रकाशित आयुर्वेद के माध्यम से ।
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1:- सर्दी-खाँसी से राहत :- अदरक शरीर के रक्षातंत्र को मजबूत करके खाँसी और सर्दी से राहत देता है । ठोड़ा उष्ण प्रकृति का होने के कारण यह सर्दी लगकर होने वाले बुखार में भी लाभ करता है । दिनभर में ऐसे ही 5-7 बार अदरक के छोटे छोटे टुकडों को मुँह में ड़ालकर चूसने से सर्दी से राहत मिलती है और शरीर से अशुद्धियाँ भी बाहर निकल जाती है ।
एक चम्मच अदरक पाउडर को एक गिलास पानी के साथ पकाकर दिन में 2-3 बार पीने से बहुत अच्छा लाभ मिलता है ।
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2:- आर्थ्राइटिस में लाभ :- अदरक में सूजन को उतारने का गुण विशेषतौर पर पाया जाता है जिस कारण यह रयुमेटिड-आर्थ्राइटिस, ऑस्टियो-आर्थ्राइटिस और गॉउट में सूजन होने के कारण पैदा होने वाले दर्द में राहत देता है । दर्द से राहत पाने के लिये निम्न प्रकार प्रयोग करें
गीली अदरक को कूटकर पेस्ट बना कर उसको हल्का सा गर्म करके उसमें थोड़ा सा हल्दी चूर्ण मिलाकर दर्द वाले जोड़ पर सूती कपड़े के साथ पुल्टिस बाँध दें और 2-3 घण्टे बँधा रहने दें । रोज दो बार बाँधना चाहिये ।
तिल के तेल को 100 मि०ली० लेकर उसको अदरक के 200 मि०ली० रस के साथ पकायें जब पकते पकते रस पूरा जल जाये और केवल तेल बाकि रहे तोआग पर से उतारकर ठण्डा करके काँच की शीशी में भर लें । उपरोक्त पुल्टिस को खोलकर इस तेल की मालिश करवायें ।
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3:- मासिक पीड़ा को खत्म करे :- कुछ माताओं-बहनों को मासिक की औरतो कोई समस्या नही होती बस मासिक के समय पर दर्द बहुत होता है । अदरक इस समस्या का भी समाधान देता है । चूःकि अदरक एक प्राकृतिक वेदनाशामक है इसलिये यह इस समस्या में बहुत लाभकारी होता है । प्रयोग विधि इस प्रकार है
अदरक पाउडर 3-5 ग्राम का सेवन गुनगुने पानी के साथ किया जाना चाहिये रोज दो बार ।
बिना पत्ती की अदरक की चाय बनाकर पीने से भी दर्द में बहुत आराम मिलता है ।
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4:- पाचन को ठीक रखे :- अदरक में वायु को शमन करने की प्रवृत्ति होती है जिस कारण यह गड़बड़ हुये पेट को सही करता है । यह पेट की माँसपेशियों को भी रिलैक्स कर देता है जिस कारण पेट में दर्द और गैस के अफारे में राहत देता है । आयुर्वेदिक चिकित्सक भूख न लगने और पाचन कमजोर होने पर अपने रोगियों को अदरक से बनी औषधियों को प्रमुखता से प्रयोग करवाते हैं ।
पाचन को ठीक करने के लिये खाना खाने के बाद 5 ग्राम अदरक का टुकड़ा खूब चबा चबा कर खायें ।
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5:- मॉर्निंग सिकनेस से राहत :- गर्भवती महिलाओं को मॉर्निंग की समस्या बहुत आम होती है । अदरक में विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स पाया जाता है जो मॉर्निंग सिकनेस की समस्या को बहुत अच्छी तरह से ठीक करता है । इसके अतिरिक्त यह गर्भावस्था में होने वाले जी मिचलाने की समस्या को भी ठीक करता है । निम्न लिखित तरीके से प्रयोग करें
अदरक को बारीक-बारीक लच्छे जैसा काटकर उसमें शहद मिलाकर खायें ।
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6:- माइग्रेन में लाभ :- अदरक का प्रभाव रक्तवाहिनियों पर पाया जाता है । जिस कारण से यह माइग्रेन जैसे दर्द में रोगी को बहुत लाभ प्रदान करता है । माइग्रेन के दर्द में राहत पाने के लिये अदरक वाली चाय पीनी चाहिये जिससे माइग्रेन में भी आराम मिलता है और माइग्रेन के दौरान उल्टी की अनूभुति भी नही होती ।
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7:- हृदय को स्वस्थ रखे :- प्राचीन समय से ही अदरक का प्रयोग हृदय को स्वस्थ रखने के लिये किया जा रहा है । यह कोलेस्ट्रॉल को कम करता है जिससे ब्लडप्रेशर नियंत्रित रहता है जिससे हृदय बहुत सी सम्भावित बीमारियों से बचा रहता है । अदरक में पोटाशियम पाया जाता है जिस कारण यह हृदय का परममित्र होता है और मैग्नीज़ होने से यह हृदय का रक्षक होता है । इसलिये दिल के रोगो से बचने के लिये अपनी नियमित खानपान शैली में अदरक को जरूर शामिल करें ।
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8:- खाँसी का उपचार करे :- अदरक का उष्ण गुण कफ के जमने की समस्या का समाधान देता है जिससे खाँसी रुकती है । साथ ही अदरक में दर्दनिवारक गुण पाये जाते हैं जिससे बार बार खाँसने से गला दुख जाने का इलाज हो जाता है । अदरक की गर्मी से सीने/फेफड़ों में जमा कफ भी पिघलकर बाहर निकल जाता है ।
अदरक के छोटे छोटे टुकड़ों को काली मिर्च के दानों के साथ चबाकर खाया जाना चाहिये ।
ऊपर बताया गया अदरक रस और तिल वाला तेल भी सीने पर मालिश के रोज 2-3 बार प्रयोग किया जा सकता है ।

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